Nand Ghar Aaj Bhayo Anand

श्री कृष्ण प्राकट्य नन्द घर आज भयो आनन्द मातु यशोदा लाला जायो, ज्यों पूनों ने चन्द गोपी गोप गाय गायक-गन, सब हिय सरसिज वृन्द नन्दनँदन रवि उदित भये हिय, विकसे पंकज वृन्द वसुधा मुदित समीर बहत वर, शीतल मन्द सुगन्ध गरजत मन्द मन्द घन नभ महँ, प्रकटे आनँद कन्द माया बन्धु सिन्धु सब सुख के, […]

He Hanumat Ham Adham Daya Kari Ke Apnao

श्री हनुमान स्तुति हे हनुमत! हम अधम दया करिके अपनाओ हे मारुति! भव-जलधि बहि रहो पार लगाओ हे अञ्जनि के तनय! शरन अपनी लै लीजै हे करुनाकर! कृपा कि’रनि पै करि दीजै हे कपि कौशल स्वामि प्रिय, तव नामनि मुखतें कहूँ हे केशरिसुत! तव चरन, चंचरीक बनि नित रहूँ  

Hari Ju Hamari Aur Niharo

शरणागति हरिजू! हमरी ओर निहारो भटकि रहे भव-जलनिधि माँही, पकरो हाथ हमारो मत्सर, मोह, क्रोध, लोभहु, मद, काम ग्राह ग्रसि डारो डूबन चाहत नहीं अवलम्बन, केवट कृष्ण निकारो बन पाषान परे इत उत हम, चरननि ठोकर मारो केवल किरपा प्रभु ही सहारो, नाथ न निज प्रन टारो  

Hamari Radha Ati Sukumari

श्री राधा हमारी राधा अति सुकुमारी विहरत है वृषभानु महल में, चहुँ दिशि करत उजारी लोचन युगल खिले पंकज दोउ, मातु बजावति तारी आवति दौरि अङक में उछरैं, हँसनि देत किलकारी गोरो अंग श्याम हिय धारति, श्यामा श्याम बिहारी दुग्ध धवलिया तनु छाया सम, होंहि न पियते न्यारी  

Swamin Pashupate Prabho Das Ke Pas Chudao

शिवाशीव स्तुति स्वामिन्! पशुपति! प्रभो! दास के पास छुड़ाओ जगदम्बा! माँ! उमा वत्स कूँ हृदय लगाओ भटक्यो जग महँ जनक! शरन चरनन महँ दीजे माँ! अब गोद बिठाय चूमि मुख सुत कूँ लीजे यद्यपि हौं अति अधमहूँ, तऊ पिता! अपनाइ लैं मैं जो साधन रहित सुत, कूँ हिय तें चिपकाइ लैं  

Van Te Aawat Shri Giridhari

वन से वापसी वनतैं आवत श्रीगिरिधारी सबहिं श्रवन दै सुनहु सहेली, बजी बाँसुरी प्यारी धेनु खुरनि की धुरि उड़त नभ, कोलाहल अति भारी गावत गीत ग्वाल सब मिलिकें, नाचत बीच बिहारी मलिन मुखी हम निशि सम नारी, बिनु हरि सदा दुखारी कृष्णचन्द्र ब्रजचन्द्र खिलें नभ, तब हम चन्द्र उजारी मिटै ताप संताप तबहिं जब, दृष्टि […]

Radha Ras Ki Khani Sarasta Sukh Ki Beli

श्री राधा राधा रस की खानि, सरसता सुख की बेली नन्दनँदन मुखचन्द्र चकोरी, नित्य नवेली नित नव नव रचि रास, रसिक हिय रस बरसावै केलि कला महँ कुशल, अलौकिक सुख सरसावै यह अवनी पावन बनी, राधा पद-रज परसि के जिह राज सुरगन इन्द्र अज, शिव सिर धारें हरषि के

Yashoda Kaiso Lala Jayo

यशोदा के लाल यशोदा कैसो लाला जायो कोई कहे कुसुम अलसी सम, अन्जन अपर बतायो कोई दुर्वा-वन सम शोभा, उत्पल द्युति कहि गायो कोई कहे जनम नहिं याको, छिपि मधुबन तें आयो कोई कहे ब्रह्मा को बाबा, वेदहु भेद न पायो कैसो कहे कहत सकुचावत, नहिं हम दरशन पायो गोविन्द गोकुल कुँवर गोपपति, गोपीश्वर कहलायो […]

Bin Kaju Aaj Maharaj Laj Gai Meri

द्रोपदी का विलाप बिन काज आज महाराज लाज गई मेरी दुख हरो द्वारिकानाथ शरण मैं तेरी दुःशासन वंश कठोर, महा दुखदाई खैंचत वह मेरो चीर लाज नहिं आई अब भयो धर्म को नास, पाप रह्यो छाई यह देख सभा की ओर नारि बिलखाई शकुनि दुर्योधन, कर्ण खड़े खल घेरी दुख हरो द्वारिकानाथ शरण मैं तेरी […]

Param Dham Saket Ayodhya

श्री अयोध्या धाम परम धाम साकेत अयोध्या, सुख सरसावनि हरन सकल सन्ताप, जगत के दुःख नसावनि सरयू को शुभ नीर, पीर सबई हरि लेवै हियकूँ शीतल करै अन्त में, प्रभु पद देवै करें धाम मँह बास जे, ते निश्चत तरि जायँगे कामी सब अघ मेंटि कें, धाम प्रभाव दिखायँगे